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हम को यारों ने याद भी न रखा जौन' यारों के यार थे हम तो

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भूल शायद बहुत बड़ी कर ली दिल ने दुनिया से दोस्ती कर ली
जो दोस्त हैं वो माँगते हैं सुल्ह की दुआ दुश्मन ये चाहते हैं कि आपस में जंग हो
हटाए थे जो राह से दोस्तों की वो पत्थर मिरे घर में आने लगे हैं
दोस्ती ख़्वाब है और ख़्वाब की ता'बीर भी है रिश्ता-ए-इश्क़ भी है याद की ज़ंजीर भी है
पत्थर तो हज़ारों ने मारे थे मुझे लेकिन जो दिल पे लगा आ कर इक दोस्त ने मारा है
लोग डरते हैं दुश्मनी से तिरी हम तिरी दोस्ती से डरते हैं
मेरे हम-नफ़स मेरे हम-नवा मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे मैं हूँ दर्द-ए-इश्क़ से जाँ-ब-लब मुझे ज़िंदगी की दुआ न दे
ये कहाँ की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेह कोई चारासाज़ होता कोई ग़म-गुसार होता
दुश्मनों से प्यार होता जाएगा दोस्तों को आज़माते जाइए
ऐ दोस्त तुझ को रहम न आए तो क्या करूँ दुश्मन भी मेरे हाल पे अब आब-दीदा है