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पत्थर तो हज़ारों ने मारे थे मुझे लेकिन जो दिल पे लगा आ कर इक दोस्त ने मारा है
ख़ुदा के वास्ते मौक़ा न दे शिकायत का कि दोस्ती की तरह दुश्मनी निभाया कर
दुश्मनों ने जो दुश्मनी की है दोस्तों ने भी क्या कमी की है
एक बेहतरीन किताब 100 अच्छे दोस्त के बराबर है, लेकिन एक सर्वश्रेष्ठ दोस्त पुस्तकालय के बराबर है। -- एपीजे अब्दुल कलाम
अगर तुम्हारी अना ही का है सवाल तो फिर चलो मैं हाथ बढ़ाता हूँ दोस्ती के लिए
भूल शायद बहुत बड़ी कर ली दिल ने दुनिया से दोस्ती कर ली
ऐ दोस्त तुझ को रहम न आए तो क्या करूँ दुश्मन भी मेरे हाल पे अब आब-दीदा
जीवन में दोस्त तो आते-जाते रहते हैं, लेकिन भाई हर समय के उपलब्ध है।
हटाए थे जो राह से दोस्तों की वो पत्थर मिरे घर में आने लगे हैं
दोस्ती का कोई मज़हब नहीं होता।