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तुम नफरत का धरना
इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया वर्ना हम भी आदमी थे काम के
थोड़ा डुबूंगा, मगर मैं फिर तैर आऊंगा, ऐ ज़िंदगी, तू देख, मैं फिर जीत जाऊंगा
इश्क किया है तो तबाही से मत डर, और तबाह होना है तो जमके इश्क कर..!!!
ये मेरा इश्क है इसे झूठा ना कहो हाँ, एकतरफा कहने का हक है तुम्हें!
बेकार में मोहब्बत से नफरत हो गयी।
तुम बस काबिल हो बस मेरी नफरत के।
नही हो अब तुम हिस्सा मेरी किसी हसरत के,
आप प्रेम में खड़े नहीं हो सकते, आप प्रेम में चढ़ नहीं सकते, आप प्रेम में उड़ नहीं सकते - आप प्रेम में सिर्फ डूब सकते हैं।
जैसे प्यार को मानते ही नहीं थे।