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जो दोस्त हैं वो माँगते हैं सुल्ह की दुआ दुश्मन ये चाहते हैं कि आपस में जंग हो

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ऐ दोस्त तुझ को रहम न आए तो क्या करूँ दुश्मन भी मेरे हाल पे अब आब-दीदा है
दोस्ती का कोई मज़हब नहीं होता।
हम को यारों ने याद भी न रखा जौन' यारों के यार थे हम तो
एक भाई एक दोस्त नहीं हो सकता है, लेकिन एक दोस्त हमेशा एक भाई रहेगा।
जो अपना दोस्त खुद बन जाता है उसे दोस्तों की दोस्ती की जरूरत ही नहीं रहती।
मेरे हाथों की लकीरें खास हैं, क्योंकि दोस्त के रूप में भाई पास है।
जिंदगी में अगर अच्छे दोस्त हों, तो इससे खूबसूरत और कुछ नहीं हो सकता।
ये कहाँ की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेह कोई चारासाज़ होता कोई ग़म-गुसार होता
दोस्ती ख़्वाब है और ख़्वाब की ता'बीर भी है रिश्ता-ए-इश्क़ भी है याद की ज़ंजीर भी है
एक सच्चा दोस्त वह होता हैं जो तब भी हमारे साथ चलता जब पूरी दुनिया हमसे मुंह मोड़ लेती हैं।