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भले ही गिनती के चार हो मगर, जो दोस्त हो वो वफादार हो।

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किताबों से बढ़कर सच्चा दोस्त और कोई नहीं हो सकता। यह आपके सुख-दुख तथा जीवन के हर पड़ाव में आपका साथ देता है।
जो आने वाला है वह हमेशा गुजरे कल से बेहतर होगा, यह सोच आपको कभी निराश नही होने देगी।
इस जीवन में अगर धैर्य को अपना मित्र बना लिया, तो हम जो चाहें वो पा सकते हैं।
दोस्त केवल वही हो सकता हैं जो आपको अच्छे से जानता हैं और आपसे प्यार करता हैं।
दोस्ती का कोई मज़हब नहीं होता।
जीवन में दोस्त तो आते-जाते रहते हैं, लेकिन भाई हर समय के उपलब्ध है।
ऐ दोस्त तुझ को रहम न आए तो क्या करूँ दुश्मन भी मेरे हाल पे अब आब-दीदा है
जो अपना दोस्त खुद बन जाता है उसे दोस्तों की दोस्ती की जरूरत ही नहीं रहती।
अक़्ल कहती है दोबारा आज़माना जहल है दिल ये कहता है फ़रेब-ए-दोस्त खाते जाइए
प्यार हम दोनों ने किया मगर तड़पना सिर्फ मेरे नसीब