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तुम बस काबिल हो बस मेरी नफरत के।
छुपा रहा हूं इश्क अभी सबसे पर एक दिन सरेआम तुम्हें लेने आऊंगा
किसी से नफरत रखने में उतना मजा नहीं है जितना उसे माफ कर भुला देने में है।
मैं बिन फेरों के भी रिश्ता निभाऊंगा बश तुम मेरा हाथ थामें रखना
मैं प्यार का इस्तीफा
तेरी हर एक बात को हंसते-हंसते सह लूंगा बस मोहब्बत में शामिल कोई और ना हो
बात जो भी हो सामने बया होती है ए दोस्त इश्क़ में चालाकियाँ कहाँ होती है
दूसरों की बातों में आकर वैसा कभी मत बनना, जैसा तुम खुद कभी बनना नही चाहते।
जैसे प्यार को मानते ही नहीं थे।
अब ऐसे नफरत जताते हो