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इससे ज्यादा इश्क का सबूत और क्या दूं साहब मैंने उसके जिस्म को नहीं उसकी रूह को चुना है
जैसे प्यार को मानते ही नहीं थे।
निपुणता हमेशा आपके आसपास के लोगों के प्रति आपके प्रेम और परवाह का नतीजा होनी चाहिए - न कि एक मशीनी और उदासीन कार्य-भावना का।
आप प्रेम में खड़े नहीं हो सकते, आप प्रेम में चढ़ नहीं सकते, आप प्रेम में उड़ नहीं सकते - आप प्रेम में सिर्फ डूब सकते हैं।
ये वही लोग है जिन्हें प्यार में सिर्फ नफरत ही मिलती है।
अब बात नफरत की है तो नफरत ही सही।
तुम ना ही मिलते तो अच्छा था,
धोखा देकर ऐसे चले गए,
दुनिया को नफरत का सुबूत नहीं देना पड़ता,
ज़िन्दगी भर नहीं दूंगा।