More Quotes
इससे ज्यादा इश्क का सबूत और क्या दूं साहब मैंने उसके जिस्म को नहीं उसकी रूह को चुना है
अब तो शायद ही मुझसे मुहब्बत करेगा कोई, तेरी तस्वीर जो मेरी आखों में साफ नजर आती है !
व्यक्ति कर्मों में जीता है वर्षों में नहीं
जैसे कभी जानते ही नहीं थे
समझ लेना तुम मुझे मेरे बिना कहे खामोशी समझना भी प्रेम ही है
तुम बस काबिल हो बस मेरी नफरत के।
अब वो नफरत में बदल गयी है।
प्यार में अगर किसी के लिए रोना आए तो समझ लेना प्यार सच्चा है
छुपा रहा हूं इश्क अभी सबसे पर एक दिन सरेआम तुम्हें लेने आऊंगा
तेरी हर एक बात को हंसते-हंसते सह लूंगा बस मोहब्बत में शामिल कोई और ना हो