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स्टेशन जैसी हो गयी है ज़िन्दगी, जहां लोग तो बहुत है, पर अपना कोई नह।
ज़िन्दगी पल-पल ढलती है, जैसे रेत मुठ्ठी से फिसलती है कुछ खोकर पछताना क्यों, ज़िंदगी जैसी भी है बस एक ही बार मिलती है
शायद ये चेहरा मेरा नहीं है लेकिन कुछ चेहरे देखकर मुझे मेरा चेहरा बदलने का मन करता है।
मुस्कुरा कर देखो ज़िन्दगी जीने का मजा भी आएगा और मंजिल भी मिल जाएगी।
ना कोई तरंग है, ना कोई उमंग है, मेरी ज़िन्दगी भी क्या एक कटी पतंग है
ज़िन्दगी मुझे सताती बहुत है, मेरी मेहनत देख खफ़ा जो रहती है।
हर फैसला मेरा बेहतर था सिवाए ज़िन्दगी में तेरे आने के।
ज़िन्दगी में अगर गुलाब की तरह खिलना है तो कांटों से तालमेल की कला को सीखना ही होगा.
आप प्रेम में खड़े नहीं हो सकते, आप प्रेम में चढ़ नहीं सकते, आप प्रेम में उड़ नहीं सकते - आप प्रेम में सिर्फ डूब सकते हैं।
याद रहे ये ज़िन्दगी तुम्हें हारने का मौका तब तक नहीं देगी, जब तक तुम खुद न हार मान लो।