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मैदान से हारा हुआ इंसान तो फिर से जीत सकता है, लेकिन मन से हारा हुआ इंसान कभी नहीं जीत सकता इसलिए मन से कभी हार मत मानना।
किसी भी इंसान की इच्छाशक्ति और दृढ़संकल्प उसे भिखारी से राजा बना सकती है
वो मुश्किल दौर ही होता है जो इंसान को मज़बूत बना देता है ताकी वो हीरे की तरह चमक सके
फिर पलट रही हैं सर्दियों की सर्द शामें, फिर तेरी यादों में जलने के ज़माने आये!
इंसान एक ऐसा ग़ाफिल मंसूबा साज़ है कि वह अपनी सारी जिंदगी की प्लानिंग में कभी अपनी मौत को शामिल ही नहीं करता।
इस जीवन में मैं पूरी तरह से इंसान हूं: महसूस करना, देना, लेना, हंसना, खोना, मिलना, नाचना, प्यार करना, इंसान बनना। ये सारी चीज़े इंसान के जीवन का एक अहम हिस्सा है।
इंसान का असली चेहरा तब सामने आता हैं जब वो नशे में होता हैं... फिर चाहे नशा पैसे का हो, पद का हो, शक़्ल का हो या शराब का...
मुस्कुराते हुए इंसान को कभी जब देखना, हो सकता है रूमाल गिला मिले
इंसान नीचे बैठा दौलत गिनता है कल इतनी थी आज इतनी बढ़ गयी। ऊपर वाला हंसता है और इंसान की सांसे गिनता है, कल इतनी थी आज इतनी कम हो गयी।
अगर एक हारा हुआ इंसान हारने के बाद भी मुस्कूरा दें.तो जितने वाला भी जीत की खुशी खो देता है।