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इससे ज्यादा इश्क का सबूत और क्या दूं साहब मैंने उसके जिस्म को नहीं उसकी रूह को चुना है
ज़रा सी वक़्त ने करवट क्या ली, गैरों की लाइन में सबसे आगे अपनों को पाया हमने!
दिल पर लग जाती है उन्हें अक्सर हमारी बातें, जो कहते थे तुम कुछ भी बोलो बुरा नहीं लगता!
मैं झुक के उसके सामने खड़ा क्या हुआ, उसने मुझे पायदान बना दिया!
वक़्त के साए में छुपी है जिंदगी की राह, खुदा की ख़फ़ा आँखों में बस गया है इक दर्द का जहर!
दर्द की दास्तानें भी होती हैं सुनहरी, क्योंकि उनमें हमारी मोहब्बत की ख़ुशबू छिपी होती है!
मेरा परिवार मेरी ताकत और मेरी कमज़ोरी है।
इश्क़ करो ऐसा की जमाना भी याद करे न की ऐसा की लोग तुम्हे बर्बाद कहें.
सोचता हूं आज इश्क जता दूं क्या तुमसे मोहब्बत है यह तुम्हें बता दूं क्या.
तेरी एक मुस्कान से सुधर गयी तबियत मेरी, बताओ यार इश्क करते हो या इलाज करते हो!