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कौन ज्यादा मजबूर है वो जो सड़कों पर सुकून की नींद सोता है या वो जो लाखों के घर में भी नींद के लिये तरसता है।
लम्हे तो है बीते सारे लेकिन लगते है आज भी जैसे हो वो कल
दिल के रिश्तों में पैसों का हिसाब नही होता... क्यूं की पैसों से चीजों का सौदा होता है , इंसानों का नहीं, और अगर हो सौदा रिश्तों में तो वो रिश्ता दिल से नही होता - prabhamayee parida
व्यक्ति कर्मों में जीता है वर्षों में नहीं
ऐसी दुनिया का आगाज़ करो जो कल करो सो आज़ करो - चंदन की कलम
कहो कि कैसे गुजर रही है रात भारी या दिन है गम में, या हमारी तरह जिंदगी रेत सी यूं फिसल रही है।
माहौल यहा कुछ इस तरह है। अजब सी कशीश हर एक मनमे। जी रहा है ,हरकोई डर डर के.. मांग रहा है ,जिंदगी मर मर के ए खुदा के बंदे , ढुंड जरा जमानेमे खुशीया हजार मिलेंगी, हर एक पलमे लाखो जनम जी लेगा , बस तू एक बार जीना सीख ले।
इंसान का असली चेहरा तब सामने आता हैं जब वो नशे में होता हैं... फिर चाहे नशा पैसे का हो, पद का हो, शक़्ल का हो या शराब का...
ज़िन्दगी के बहुत से इम्तिहान बाकी हैं अभी तो बस चलना सीखा है नापने को पूरी कायनात बाकी है। गिरूंगा सीखूंगा उठूंगा अभी सीखने को पूरा संसार बाकी है।
लम्हे तो है बीते सारे लेकिन लगते है आज भी जैसे हो वो कल