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जब इंसान अन्दर से टूटता है तो बहार से खामोश हो जाता

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मुस्कुराते इंसान की कभी जेबें टटोलना, हो सकता है उसका रुमाल गिला मिले.
तुझे भुलाने की जिद्द थी, अब भुलाने का ख्वाब है, ना जिद्द पूरी हुई और ना
इस जीवन में मैं पूरी तरह से इंसान हूं: महसूस करना, देना, लेना, हंसना, खोना, मिलना, नाचना, प्यार करना, इंसान बनना। ये सारी चीज़े इंसान के जीवन का एक अहम हिस्सा है।
चलो अब जाने भी दो क्या करोगे दास्ताँ सुनकर, ख़ामोशी तुम समझोगे नहीं और बयाँ हमसे होगा
ज़िन्दगी में कुछ ज़ख्म ऐसे होते है जो कभी नहीं भरते बस इंसान उन्हें छुपाने का हुनर सीख जाता है
जब इंसान अन्दर से टूटता है तो बहार से खामोश हो जाता है।
बहुत मजबूत हो जाते है वो लोग, जिनके पास खोने को कुछ नहीं
कोई किसी का नहीं होता दुनिया में, जब दिल भर जाता है तो लोग याद करना भी छोड़ देते
आज तो हम ख़ूब रुलायेंगे उन्हें, सुना है उसे रोते हुए लिपट जाने की आदत
मैदान में हारा हुआ इंसान फिर से जीत सकता है, लेकिन मन से हारा हुआ इंसान कभी नहीं जीत सकता।