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इंसान अपनी कमाई के हिसाब से नहीं, अपनी ज़रूरत के हिसाब से गरीब होता
जब इंसान तन्हा चलना सीख जाता है तब वो दुनिया को समझ चुका
तुझे भुलाने की जिद्द थी, अब भुलाने का ख्वाब है, ना जिद्द पूरी हुई और ना
कोई किसी का नहीं होता दुनिया में, जब दिल भर जाता है तो लोग याद करना भी छोड़ देते
हमे तुमसे प्यार कितना ये हम नहीं जाणते मगर जी नहीं सकते तुम्हारे बीना।
अक्सर उन लोगो के दिल टूटे होते है, जो सबका दिल रखने की कोशिश करते
मनुष्य कितना भी गोरा क्यों ना हो परंतु उसकी परछाई सदैव काली होती है…!! “मैं श्रेष्ठ हूँ” यह आत्मविश्वास है लेकिन…. “सिर्फ मैं ही श्रेष्ठ हूँ” यह अहंकार है
कितना अजीब भ्रम है ये मानना कि सुन्दरता
बहुत मजबूत हो जाते है वो लोग, जिनके पास खोने को कुछ नहीं
कितना अजीब है लोगों का अंदाज-ऐ-मोहब्बत, रोज एक नया जख्म देकर कहते हैं अपना ख्याल रखना