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इंसान अपनी कमाई के हिसाब से नहीं, अपनी ज़रूरत के हिसाब से गरीब होता
इंसान एक ऐसा ग़ाफिल मंसूबा साज़ है कि वह अपनी सारी जिंदगी की प्लानिंग में कभी अपनी मौत को शामिल ही नहीं करता।
अहंकार में डूबे इंसान को, ना तो खुद की गलतियां दिखाई देती है और ना दूसरों की “अच्छी” बात।
जो इंसान मन की तकलीफों को नही बता पता, उसे ही गुस्सा सबसे ज्यादा आता है।
खुशनसीब हैं वो भाई, जिनकी ऐसी क्यूट सी बहन होती हैं, लड़ने में सबसे आगे और मनाने में सबसे पीछे होती है।
जो इंसान आपकी क़दर करनी न जनता हो, बेहतर है ऐसे इंसान से दूरी बना लेना।
इंसान का असली चेहरा तब सामने आता हैं जब वो नशे में होता हैं... फिर चाहे नशा पैसे का हो, पद का हो, शक़्ल का हो या शराब का...
जो इंसान सही और गलत, पसंद और नापसंद के दायरे में ही फंसा हुआ है, वह प्रेम के तानेबाने को कभी नहीं जान पाएगा।
बहन का प्यार भाई के लिए होता है खास, इसे कुछ इस तरह से समझना आप जनाब, बड़ी हो बहन, तो वो होगी डांट से बचाने वाली, छोटी हो बहन, तो वो होगी गलतियां छुपाने वाली।
बहनें उन्हीं को आती हैं जिनके कर्म महान होते हैं। महिलाएं सभ्यता की रक्षा करती हैं और कल्याण प्रदान करती हैं।