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मुस्कुराते हुए इंसान की कभी जेबे देखना ! हो सकता है रूमाल गिला मिले.
इंतजार करने वाले को सिर्फ उतना ही मिलता है, जितना कोशिश करने वाले छोड़ देते है।
किस्मत की लकीरों पर ऐतबार करना छोड़ दिया, जब इंसान बदल सकते हैं तो किस्मत क्यों नहीं
इंसान एक ऐसा ग़ाफिल मंसूबा साज़ है कि वह अपनी सारी जिंदगी की प्लानिंग में कभी अपनी मौत को शामिल ही नहीं
इंसान नीचे बैठा दौलत गिनता है कल इतनी थी आज इतनी बढ़ गयी। ऊपर वाला हंसता है और इंसान की सांसे गिनता है, कल इतनी थी आज इतनी कम
मुस्कुराते हुए इंसान की कभी जेबे देखना, हो सकता है रूमाल गिला मिले!
खुद पर काबु रखना एक परिपक्व इंसान की निशानी है; वक्त से पहले खुद पर काबु खो देना अपरिपक्वता की पहचान है।
जब इंसान तन्हा चलना सीख जाता है तब वो दुनिया को समझ चुका
जब अंधेरे की गहराई में खो जाते हैं, तभी सितारों की चमक सबसे स्पष्ट होती है।
जब से वो छोड़ गया है, ज़िंदगी बेमतलब सी हो गई है.