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सोचता हूं आज इश्क जता दूं क्या तुमसे मोहब्बत है यह तुम्हें बता दूं क्या.

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इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया वर्ना हम भी आदमी थे काम के
बजते हैं ढोल तो करते हैं बल्ले बल्ले आई लव यू मेरे प्यारे से रसगुल्ले..
मैं इश्क लिखूं और उसे हो जाए काश मेरी शायरी में कोई ऐसे खो जाए
जो लोग एक दूसरे से सचमुच बहुत प्रेम करते हैं, वही लोग प्रियजन को खो देने के बाद भी हालात को शालीनतापूर्वक सम्हाल पाएंगे ।
प्रेम की गहराई को जानने के लिए आपके कम-से-कम कुछ अंश को मिटना होगा। वरना किसी दूसरे के लिए जगह नहीं होगी ।
मेरी प्रिय, तुम जब मुस्कुराती हो, मेरा दिन रौशन हो जाता है, मैं सोचता हूं तुम न होती तो मेरा जीवन भी अधूरा रह जाता।
प्रेम एक समाहित करने की प्रक्रिया है। जब एक बार आपको मैं अपने एक अंश के रूप में शामिल कर लेता हूं, मैं आपके साथ वैसा ही होऊंगा, जैसा मैं खुद के साथ हूं। - सद्‌गुरु
प्रेम तो खुद का पूर्ण समर्पण है इसमें ईगो और अनादर का कोई स्थान नहीं होता.
मुझे खुद पर इतना भरोसा है कि यह दिल हजारों के बीच रहकर भी सिर्फ आपका रहेगा.
काश यह दिल अपने बस मे होता, न किसी की याद आती, न किसी से प्यार होता.