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प्रेम एक समाहित करने की प्रक्रिया है। जब एक बार आपको मैं अपने एक अंश के रूप में शामिल कर लेता हूं, मैं आपके साथ वैसा ही होऊंगा, जैसा मैं खुद के साथ हूं। - सद्गुरु
सोचता हूं आज इश्क जता दूं क्या तुमसे मोहब्बत है यह तुम्हें बता दूं क्या..
बात जो भी हो सामने बया होती है ए दोस्त इश्क़ में चालाकियाँ कहाँ होती है
वक़्त कट तो भी नहीं, वक़्त रुकता भी नहीं। दिल है सजदे में मगर, इश्क झुकता भी नहीं।
ये मेरा इश्क है इसे झूठा ना कहो हाँ, एकतरफा कहने का हक है तुम्हें!
दिल में तेरी चाहत लबो पे तेरा नाम है, तू मोहब्बत कर या ना कर, मेरी ज़िन्दगी “तेरे नाम” है.
इश्क किया है तो तबाही से मत डर, और तबाह होना है तो जमके इश्क कर..!!!
प्रेम कोई सहूलियत का साधन नहीं है। यह खुद को मिटाने की एक प्रक्रिया है ।
इससे ज्यादा इश्क का सबूत और क्या दूं साहब मैंने उसके जिस्म को नहीं उसकी रूह को चुना है
तमन्ना-ए-इश्क तो हम भी रखते है, किसी के दिल में हम भी धड़कते है, न जाने हमें वो कब मिलेंगे, जिसके लिए हम रोज़ तड़पते है!