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इससे ज्यादा इश्क का सबूत और क्या दूं साहब मैंने उसके जिस्म को नहीं उसकी रूह को चुना है

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रूह तक कांप जाती है, तेरे ना होने के ख्याल को सोचकर ही,
छुपा रहा हूं इश्क अभी सबसे पर एक दिन सरेआम तुम्हें लेने आऊंगा
हमें उम्र से हमने तुमको चाहा है, जिस उम्र में हम जिस्म से वकीफ ना थे..
अब बात नफरत की है तो नफरत ही सही।
नही हो अब तुम हिस्सा मेरी किसी हसरत के,
प्यार में अगर किसी के लिए रोना आए तो समझ लेना प्यार सच्चा है
ये वही लोग है जिन्हें प्यार में सिर्फ नफरत ही मिलती है।
दुनिया को नफरत का सुबूत नहीं देना पड़ता,
तुम ना ही मिलते तो अच्छा था,
वक़्त कट तो भी नहीं, वक़्त रुकता भी नहीं। दिल है सजदे में मगर, इश्क झुकता भी नहीं।