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प्रेम एक समाहित करने की प्रक्रिया है। जब एक बार आपको मैं अपने एक अंश के रूप में शामिल कर लेता हूं, मैं आपके साथ वैसा ही होऊंगा, जैसा मैं खुद के साथ हूं। - सद्गुरु
निपुणता हमेशा आपके आसपास के लोगों के प्रति आपके प्रेम और परवाह का नतीजा होनी चाहिए - न कि एक मशीनी और उदासीन कार्य-भावना का ।
अपने प्रेम, अपनी खुशी और अपने उल्लास को रोककर मत रखें। आप जो देते हैं, वही आपका गुण बन जाता है, न कि वह जो आप रोक कर रखते हैं ।
ईश्वर से कोई भी प्रेम कर सकता है क्योंकि वह आपसे कुछ नहीं मांगता। पर अपने पास खड़े व्यक्ति से प्रेम करने की कीमत जीवन से चुकानी पड़ती है ।
प्रेम कोई सहूलियत का साधन नहीं है। यह खुद को मिटाने की एक प्रक्रिया है ।
इश्क़ करो ऐसा की जमाना भी याद करे न की ऐसा की लोग तुम्हे बर्बाद कहें.
तमन्ना-ए-इश्क तो हम भी रखते है, किसी के दिल में हम भी धड़कते है, न जाने हमें वो कब मिलेंगे, जिसके लिए हम रोज़ तड़पते है!
काश यह दिल अपने बस मे होता, न किसी की याद आती, न किसी से प्यार होता.
अगर खुशी के आंसुओं ने, प्रेम के आंसुओं ने, परमानंद के आंसुओं ने आपके गालों को नहीं धोया है, तो आपने अभी तक जीवन का अनुभव नहीं किया है ।
प्रेम कोई सहूलियत का साधन नहीं है। यह खुद को मिटाने की एक प्रक्रिया है ।