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प्रेम एक समाहित करने की प्रक्रिया है। जब एक बार आपको मैं अपने एक अंश के रूप में शामिल कर लेता हूं, मैं आपके साथ वैसा ही होऊंगा, जैसा मैं खुद के साथ हूं। - सद्गुरु
केवल वे ही लोग, जो अपने दिमाग का कचरा किनारे रख सकते हैं, वास्तव में प्रेम और करुणा के काबिल होते हैं ।
मेरा भाई है लंगूर जैसा, दिल रखने के लिए, फिर भी कहती हूं तू लगे हूर सा।
इश्क़ करो ऐसा की जमाना भी याद करे न की ऐसा की लोग तुम्हे बर्बाद कहें.
आपके प्यार करने की, लोगों तक पहुँचने की, जीवन को अनुभव करने की क्षमता की कोई सीमा नहीं है। सीमाएँ सिर्फ शरीर और मन की होती हैं ।
दिल में कुछ जलता है, शायद दुआ धुआ सा लगता है। आंख में कुछ अच्छा है, शायद सपना कोई सुलगता है।
ख़ुशी, शांति और प्रेम – ये कोई आध्यात्मिक लक्ष्य नहीं हैं। यह सब तो समझदारीपूर्वक जीने की शुरुआत है ।
आप बुलाए हम ना आए ऐसे तो हालत नही, और तो कोई ब एक जरा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं
जिंदगी में जो चाहो हासिल कर लो, बस इतना ख्याल रखो कि आपकी मंजिल का रास्ता कभी लोगो के दिलो को तोड़ता हुआ ना गुजरे।
उसके सादगी की कोई इन्तहा नहीं है, यही तो मेरे प्यार करने के वजह रही है, माना की उसमे अलग कुछ भी नहीं है, पर जो उसमे है वो किसी और में नहीं है.