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दूसरों को खुश करने के लिए अपने मूल्यों से समझौता न करें। अपने स्वाभिमान को अक्षुण्ण रखें और चले जाएँ।
स्वाभिमान से अधिक निकट स्वार्थ जैसा कुछ नहीं है।
जब आप अपने अंदर से अहंकार मिटा देंगे तभी आपको वास्तविक शांति प्राप्त होगी !
अपने आप को इतना प्यार करो कि अपने आप को उन लोगों से घेर लो जो तुम्हारा सम्मान करते हैं।
स्वाभिमान मान्यता की एक अवस्था है कि एक व्यक्ति उतना ही महत्वपूर्ण और योग्य है जितना कि कोई अन्य इंसान।
अहंकार में डूबे इंसान को, ना तो खुद की गलतियां दिखाई देती है और ना दूसरों की “अच्छी” बात।
स्वयं के प्रति ईमानदार होना आत्म-सम्मान का सर्वोच्च रूप है। यदि आप कुछ महसूस नहीं कर रहे हैं, तो इसे न करें।
खुद को नीचा दिखाना आत्म-सम्मान की हत्या है, खुद को उठाना उसकी पूजा।
आत्म-सम्मान से भरी हर मुस्कान आपके आत्म-विश्वास की कहानी कहती है
जब आप खुद से प्यार करते हैं, तो आप अच्छा महसूस करते हैं, आप अपनी विशेषताओं, अपनी प्रतिभा, अपने कौशल और अपनी क्षमताओं को महत्व देते हैं।