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मनुष्य कितना भी गोरा क्यों ना हो परंतु उसकी परछाई सदैव काली होती है…!! “मैं श्रेष्ठ हूँ” यह आत्मविश्वास है लेकिन…. “सिर्फ मैं ही श्रेष्ठ हूँ” यह अहंकार है
जब इंसान अन्दर से टूटता है तो बहार से खामोश हो जाता
हमे तुमसे प्यार कितना ये हम नहीं जाणते मगर जी नहीं सकते तुम्हारे बीना।
जब इंसान तन्हा चलना सीख जाता है तब वो दुनिया को समझ चुका
जिंदगी में जो चाहो हासिल कर लो, बस इतना ख्याल रखो कि आपकी मंजिल का रास्ता कभी लोगो के दिलो को तोड़ता हुआ ना
हद से बढ़ जाए ताल्लुक तो गम मिलते हैं, हम इसी वास्ते हर शख्स से कम मिलते हैं.
बहुत मजबूत हो जाते है वो लोग, जिनके पास खोने को कुछ नहीं
दुश्मन से ज्यादा खतरनाक वो है, जो दोस्त बनकर धोका देते
चलो अब जाने भी दो क्या करोगे दास्ताँ सुनकर, ख़ामोशी तुम समझोगे नहीं और बयाँ हमसे होगा
वो ढूँढ रहे थे मुझे भूल जाने के तरीके, मैंने उनसे खफा होकर उनकी मुश्किल आसान कर