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कभी तो चौक के देखे कोई इंसान तरफ, किसी की आंख में हमको भी इंतजार दिखे ।
चुपके से एक दिन रख आऊं, सभी खुशियां उनके सिरहाने में, जिन्होंने एक अरसा बिता दिया, मुझे बेहतर इंसान बनाने में।
इंसान एक ऐसा ग़ाफिल मंसूबा साज़ है कि वह अपनी सारी जिंदगी की प्लानिंग में कभी अपनी मौत को शामिल ही नहीं
बड़ा भाग्यशाली है हर वो इंसान जिसके हिस्से यह सुख आया है, भाई की एक खुशी के लिए बहन ने हंसकर दुखों को अपनाया है।
कभी-कभी हम किसी के लिए उतना भी ज़रूरी नहीं होते, जितना की हम सोचते
आप कितने भी अच्छे इंसान हो पर किसी ना किसी के लिए बुरे जरूर होंगे, क्योंकि लोग हमेशा अपने स्वार्थ के अनुसार आपके बारे में सोचते हैं
शब्द ही इंसान का आइना होते हैं, शक्ल तो उम्र और समय के साथ बदल जाती है
इंसान का असली चेहरा तब सामने आता हैं जब वो नशे में होता हैं... फिर चाहे नशा पैसे का हो, पद का हो, शक़्ल का हो या शराब का...
इंसान का सारा ध्यान आज बस इस बात पर है कि ज़िंदगी जीने के तरीकों में कैसे सुधार किया जाए
किसी भी इंसान की इच्छाशक्ति और दृढ़संकल्प उसे भिखारी से राजा बना सकती है