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जो समस्याएं तुम्हें सताने लगे, कोई तुम पर उंगली उठाने लगे डरना नहीं-घबराना नहीं, बहन एक बार बढ़े क़दम को पीछे हटाना नहीं-मयंक विश्नोई
चार युगों में सिमटी श्रृष्टि, चार पहर का सन्नाटा है बहन तुम्हारे कदमों में बैठ, मन मेरा निश्चल हो जाता है-मयंक विश्नोई
माता पिता की आंख से दो बार ही आंसू आते हैं, एक लड़की घर छोड़े तब और दूसरा बेटा मुंह मोड़ ले तब.
शर्म नहीं तू गर्व हैं बहना, मेरी कलम का लिखा तू हर्फ़ है बहना तेरी नीयत मेरी पहचान है बहना, तू मेरी इकलौती शान है बहना
तू लड़ती है-झगड़ती है, सुन बहना मेरी रक्षा भी तू ही करती है ये पीड़ाएं मुझे छूं न पाए, क्यों इस चिंता से तू इतना डरती है
आकाश में जितने भी तारे हैं या कि वह प्रतिबिंब हमारे हैं बगिया है जैसे बहना की तरह, जिसने फूल दिए कई सारे हैं।
परिवार के साथ घर जाकर अच्छा खाना खाने और आराम करने से अच्छा और कुछ नहीं है।
बहन उन्हीं के हिस्से आती है, जिनके होते हैं कर्म महान सभ्यताओं का संरक्षण करती, नारी ही करती है कल्याण
इंद्रधनुष के सात रंगों सी, हैं प्यारी बहन तेरी मुस्कान जैसे आशाओं के दीप के आगे नतमस्तक सारा जहान-मयंक विश्नोई
तुम्हारे बिना तुम्हारे भाई के अस्तित्व का कोई अंदाज़ा नहीं! आपकी खुशी के बिना, खुशी की गिनती नहीं हो सकती