#Quote

कौन समझता है किसी को कोई यहां झूठे दिलासे, कोरा सा अपनापन मिलता है मुफ्त में यहां।

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भाई से ज्यादा ना कोई उलझता हैं, ना भाई से ज्यादा कोई समझता हैं.
लम्हे तो है बीते सारे लेकिन लगते है आज भी जैसे हो वो कल
"अपेक्षा" और "उपेक्षा" दोनों का होना ही गलत है "अपेक्षा" खुद को घायल करती है "उपेक्षा" दूसरों को।
ज़िन्दगी के बहुत से इम्तिहान बाकी हैं अभी तो बस चलना सीखा है नापने को पूरी कायनात बाकी है। गिरूंगा सीखूंगा उठूंगा अभी सीखने को पूरा संसार बाकी है।
इंसान का असली चेहरा तब सामने आता हैं जब वो नशे में होता हैं... फिर चाहे नशा पैसे का हो, पद का हो, शक़्ल का हो या शराब का...
व्यक्ति कर्मों में जीता है वर्षों में नहीं
भाई मुझे सताता बहुत हैं, मुसीबत में अपनापन भी जताता बहुत हैं.
आंसू किसी और के दुख को समझता नहीं है, और न ही किसी की खुशी को। - Franz Schubert
स्कुल की परिक्षाये भलेही रद्द की गयी हो। जिंदगी की बडी कठीण परीक्षा की घडी है..ये देनी ही होगी।
लम्हे तो है बीते सारे लेकिन लगते है आज भी जैसे हो वो कल