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ना कोई तरंग है, ना कोई उमंग है, मेरी ज़िन्दगी भी क्या एक कटी पतंग है

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ज़िन्दगी एक ढलती शाम की तरह है, जिसमें कहीं उथल-पुथल है, तो कहीं थोड़ा आराम भी
लेकिन नकारात्मकता के साथ खड़े होने पर, ज़िन्दगी भर गलत ही गलत होगा।
हम आने वाले ग़म को खिंचतान कर आज की ख़ुशी पे ले आते है, और उस ख़ुशी में ज़हर घोल देते है… – आनंद
हमें तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहाँ दम था, मेरी किश्ती थी डूबी वहां, जहाँ पानी कम था…
ज़िन्दगी के बहुत से इम्तिहान बाकी हैं अभी तो बस चलना सीखा है नापने को पूरी कायनात बाकी है। गिरूंगा सीखूंगा उठूंगा अभी सीखने को पूरा संसार बाकी है।
ज़िन्दगी तेरे भी कितने नखरे है, एक दिन हँसाकर महीनों रुलाती है।
अब मत खोलना, मेरी ज़िन्दगी की पुरानी किताबो को, जो था वो मैं रहा नहीं, जो हूँ वो किसी को पता नहीं
ज़िन्दगी में अगर गुलाब की तरह खिलना है तो कांटों से तालमेल की कला को सीखना ही होगा.
मैं अनुशासित हूँ ये मैं जानता हूँ, इसलिए ज़िन्दगी खूबसूरत है।
याद रहे ये ज़िन्दगी तुम्हें हारने का मौका तब तक नहीं देगी, जब तक तुम खुद न हार मान लो।