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एक बेहतरीन किताब 100 अच्छे दोस्त के बराबर है, लेकिन एक सर्वश्रेष्ठ दोस्त पुस्तकालय के बराबर है। -- एपीजे अब्दुल कलाम
इस जीवन में अगर धैर्य को अपना मित्र बना लिया, तो हम जो चाहें वो पा सकते हैं।
जो अपना दोस्त खुद बन जाता है उसे दोस्तों की दोस्ती की जरूरत ही नहीं रहती।
मैले कपडे फिर भी चल जाएंगे मगर मैला मन लंगड़ा
रिश्ता कुछ ऐसा होना चाहिए की लड़ाई जब दो में हो, तो तीसरे को पता नही चलना चाहिए।
जिसने कभी विपत्तियां नही देखी, उसे अपनी ताकत का कभी एहसास नही होगा।
भाई अगर दोस्त बन जाए तो यह जीवन आसान सा लगने लगता है।
जो आने वाला है वह हमेशा गुजरे कल से बेहतर होगा, यह सोच आपको कभी निराश नही होने देगी।
अक़्ल कहती है दोबारा आज़माना जहल है दिल ये कहता है फ़रेब-ए-दोस्त खाते जाइए
शिकवा तो बहुत है तुझसे ऐ ज़िन्दगी पर चुप इसलिए हूँ, क्योंकि जो दिया है तुमने वो भी कितनो को नसीब नही होता।