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और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
दर्द तब और भी गहरा होता है जब, हमें अपने ही लोगो से धोखा मिलता है
न जी भर के देखा न कुछ बात की बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
जब ‘दर्द’ और ‘कड़वी’ बोली दोनों मीठी लगने लगे तब समझ लीजिये कि जीना आ गया
जो लोग दर्द को समझते हैं, वो लोग कभी दर्द की वजह नहीं बनते.
अपने सपनों से सच्ची मोहब्बत करके तो देखो, जिंदगी में लोगों के आने या जाने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा
वह मासूम लगता है लेकिन वह जीना जानता है, गहरे दर्द में हंसना जानता है!
तुम कहा हो मेरे करीब आओ, मैं कहा हु मुझे पता तो चले..!!!
दुःख तुमने मुझे नहीं दिया है, मैंने अपने आप को दुःख दिया है.
जल्दबाज़ी और गुस्से में किए गये कार्य सदैव दुखदायी होते है, क्रोध वो तुफान है जिसके थमने के बाद हुए नुकसान का पता चलता है…