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रोज रोज गिरकर भी मुकम्मल खड़ा हूँ, ए मुश्किलों देखो मैं तुमसे कितना बड़ा

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खुल जाएंगे सभी रास्ते, रुकावटों से लड़ तो सही सब होगा हासिल, तू जिद्द पर अड़ तो
चार कदम चलकर ही थक जाता है और पंहुचना शीर्ष तक चाहता है, तुझे धूल में पैरों को मलना होगा,जो पानी है सफलता तो चलना
हार मत मान रे बंदे, कांटों में कलियां खिलती है अगर सच्ची लगन रखो, तो सफलता जरुर मिलती
कोई भी लक्ष्य मनुष्य ने साहस से बड़ा नहीं, हरा वही है बस, जो लड़ा
महानता वह नहीं होती कि आप गिर गए और उठे ही ना महानता उसे कहते हैं जवाब गिरकर बार-बार उठते हैं
सफलता पाने के लिए आत्म-विश्वास जरुरी है, और आत्म-विश्वास के लिए
कितना अजीब है लोगों का अंदाज-ऐ-मोहब्बत, रोज एक नया जख्म देकर कहते हैं अपना ख्याल रखना
अगर तू चलने के लिए तैयार हो तो, मंजिल तुम्हारे सामने झुकने के लिए तैयार हो
कितना अजीब भ्रम है ये मानना कि सुन्दरता
एक व्यक्ति ने कभी गलती नहीं की, जब उसने कभी भी कुछ नया करने की कोशिश नहीं की यानी जब हम कुछ नया करते है तभी गलतियां होना स्वाभाविक