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खुद का सम्मान करना वही जानता है, जिसने खुद को कठिन परिस्थितियों में संभाला हो।
जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तो उसका आपसे बात करने का तरीका भी बदल जाता है।
स्टेशन जैसी हो गयी है ज़िन्दगी, जहां लोग तो बहुत है, पर अपना कोई नह।
ऐसी बेरुखी भी देखी है हमने के लोग, आप से तुम तक तुम से जान तक, फिर जान से अनजान तक हो जाते ।
नारी के बलिदान को वही सम्मान मिलता है, जहाँ बहनों ने खुद से पहले भाई की खुशियों को रखा हो ।
मन में बातो के चलते रहने से , ज़िंदगी रुक ही जाती है।
आपकी सम्मान वह वेतन है जिसे आपको लेना होगा, आपको चाहिए वह संघटना जो आपको चुने।
खुद की सम्मान करना हमेशा आपको किसी और की सम्मान कीमत देंगे।
वो दिन नहीं वो रात नहीं वो पहले जैसे जज़्बात नहीं, होने को तो हो जाती है बात अब भी मगर इन बातों में वो बात नहीं।
स्वयं का सम्मान ही सबसे बड़ा आत्मसंतोष है।