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जिंदगी में खुशियाँ तलाश करो, दुखो का कोई अंत नहीं होता
क्यां हुआ जो हम अब अजनबी बन गए, इतनी जल्दी दूरियाँ बढ़ गई
गुजर जाएगा ये दौर भी ज़रा सा सब्र तो रख, जब खुशियों ही नहीं रुकी तो गम की क्या औकात है
जिसकी जैसी सोच वह वैसी कहानी रखता है, कोई परिंदे के लिए बन्दुक तो कोई पानी रखता है
दिल के रिश्ते तो किस्मत से मिलते है, वरना मुलाक़ात तो हजारो से होती है
उदास कर जाती है मुझे हर रोज ये शाम, ऐसा लगता है जैसे कोई भुला रहा है धीरे धीरे
आंसूं किसी के दुःख को समझता नहीं है, और न ही किसी की ख़ुशी को
कुछ लोग डायरी इसलिए लिखते है, क्योंकि उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं होता
हालातो ने खो दी इस चहेरे की मुस्कान, वरना जहां बैठते थे रौनक ला दिया करते थे
ताश का जोकर और अपनों की ठोकर अक्सर बाजी घुमा देते हैं।