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अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए
मेरे हम-नफ़स मेरे हम-नवा मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे मैं हूँ दर्द-ए-इश्क़ से जाँ-ब-लब मुझे ज़िंदगी की दुआ न दे
जब ज़िंदगी आपको पीछे धकेल दे, तो समझ जाना एक बड़ी छलांग लगाने का वक़्त आ गया है ।
जिंदगी का सफर है मुश्किलों का साथी, चलना है हमें, खुद को नया मुकाम पाने की चाहती।
एक ख्वाहिश थी के जिंदगी तेरे साथ गुजरे, एक ख्वाहिश है कि तुमसे अब उम्र भर सामना ना हो
टूटा हुआ दिल और मुस्कुराते हुए चहरे वाले व्यक्ति से, ज्यादा मजबूत कुछ भी नहीं है
इंसान का सारा ध्यान आज बस इस बात पर है कि ज़िंदगी जीने के तरीकों में कैसे सुधार किया जाए
जिंदगी कितनी भी खूबसूरत क्यों न हो, अपनों के बिना सूनी ही लगती है।
ज़िंदगी में सिर्फ चलते चले जाना ही ज़िंदगी नहीं होती आंखों में सपने और दिल में हौसलों का होना बहुत ज़रूरी है।
गुज़र जायेगा ये दौर भी ज़रा सब्र तो रख ! जब खुशियाँ ही न रुकी तो ग़म की क्या औकात है !!