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गुजर जाएगा ये दौर भी ज़रा सा सब्र तो रख, जब खुशियों ही नहीं रुकी तो गम की क्या औकात है
बदल जाओ वक्त के साथ या फिर वक्त बदलना सीखो, मजबूरियों को मत कोसो, हर हाल में चलना सीखो!
नहीं बदल सकते हम खुदको औरों के हिसाब से, एक लिबास मुझे भी दिया है, खुदा ने अपने हिसाब ।
दूसरों के चेहरे हम याद रखें हमारी ऐसी फितरत नहीं लोग हमारा चेहरा देख के अपनी फितरत बदल ले ऐसी हमारी फितरत है।
जिंदगी में खुशियाँ तलाश करो, दुखो का कोई अंत नहीं होता
चेहरे तो समय के साथ सब बदल लेते है, लेकिन हालतों को बदलने वाला ही, हालातों की बात करता है
हर ठोकर इस बात की चेतावनी देती है, की अब संभाल जाओ
कुछ लोग डायरी इसलिए लिखते है, क्योंकि उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं होता
मैंने कुछ वक्त चुप रहकर भी देख लिया, किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता
अब वो नफरत में बदल गयी है।