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ये दिन भी क़यामत की तरह गुज़रा है न जाने क्या बात थी हर बात पर रोना आया
ज्यादा बात करने वाले कुछ नहीं कर पाते और कुछ कर दिखानेवाले ज्यादा बात करने में यकिन नहीं रखते!
दर्द तब और भी गहरा होता है जब, हमें अपने ही लोगो से धोखा मिलता है
गुरुर किस बात का साहब, आज मिट्टी के उपर, तो कल मिट्टी के निचे
तेरा इंतजार करता हूँ रोज रातों में, खुद को सांसों में समेटा हुआ देखता हूँ
जिंदगी में खुशियाँ तलाश करो, दुखो का कोई अंत नहीं होता
तुम्हारे बगीचे में भी खुशबु रहती है, मेरे रोग में भी भरोसा रहता है
जिस बात से डर लगता हो, उस क्षेत्र में अपना ज्ञान बढ़ाना आरंभ कर दें, डर भाग जाएगा, डर सदैव अज्ञानता से उपजता है !
जो लोग छोटी सी बात पर भी अपनी आँखों के नीर को नहीं रोक पाते, वास्तव में वह लोग दिल के बड़े सच्चे होते हैं|
कब्रें कितनी भी क्यों न सज जाएं बोल नहीं पातीं, इसलिए जिंदा रहते ही मुस्कुराना सीख लीजिए।