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हर रक्षा बंधन मैं अपने मन के भीतर तुम्हारी सुख, समृद्धि का संकल्प लेता हूँ । संकल्प

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आकाश में जितने भी तारे हैं या कि वह प्रतिबिंब हमारे हैं बगिया है जैसे बहना की तरह, जिसने फूल दिए कई सारे हैं।
तेरे होने से ही मेरे घर परिवार में खुशियां हैं क्योंकि बहना तू मुझे मिला खुशियों का वरदान है ।
सुन बहन आँखों की चमक कभी कम मत होने देना जो होता हो हो जाए, तू हंसती आँखों को मत रोने देना
सारे जहां की खुशियां मिले मेरी बहन को, इस रक्षाबंधन पर यही दुआ है मेरी !
मैं अकेला रह जाता मायूसी भर के, जो तू मेरे घर का चिराग ना बनती मैं फिर कभी ऐसा हसमुख ना होता, जो तू बहना मेरा मान ना बनती
भय्या राखी के बंधन को निभाना, बेहन को ना भूलना।
मेरे उज्जवल भविष्य के लिए जो त्याग तुमने किया, वैसा त्याग शायद कोई दूसरा नहीं कर पायेगा ।
मेरी बहन ही तो है जो रोज मेरा हाल कुछ इस अंदाज़ में पूछती है मेरे सवालों पर हंसती है और मेरी फ़िक्र में सुबह-शाम झूझती है
माँ की ममता भी हैं तुझमें, है तुझमें पिता सा अकड़पन भी दोस्ती भी अनमोल है तेरी, अनमोल है तेरा लड़कपन भी
अगर कोई तुम्हारी कदर नहीं करता या तुम्हारा अपमान करता है… उसकी तरफ ध्यान मत दो, तुम्हारे कार्य की सफलता ही उसे खुद ब खुद जवाब दे देगी।