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हर रक्षा बंधन मैं अपने मन के भीतर तुम्हारी सुख, समृद्धि का संकल्प लेता हूँ।

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भय्या राखी के बंधन को निभाना, बेहन को ना भूलना।
हर दुःख आने वाले सुख की चिठ्ठी होती है, और हर नुक्सान होने वाले फायदे का
रक्षा बंधन के पावन अवसर पर, भाई के नाम दिल से खुशियों की बरसात करती हूँ। आपके साथ बड़ी खुशियों की उम्मीद करती हूँ।
मेरे भीतर पनपे विश्वास की जड़ तुम हो बहना, मेरी जीत का एकलौता श्रेय तुम हो बहना
तुम से ही मेरे भीतर साकारात्मक ऊर्जाओं का संचार हुआ, तुम ही मेरे विचारों की जननी हो बहना।
तू है मेरी जिंदगी की रोशनी, तेरे बिना सब कुछ है अधूरा। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर तुझे ढेर सारा प्यार !
हर रक्षा बंधन मैं अपने मन के भीतर तुम्हारी सुख, समृद्धि का संकल्प लेता हूँ । संकल्प
मैं निकला सुख की तलाश में, रास्ते में खड़े दुखों ने कहा, ‘हमें साथ लिए बिना, सुखों का पता नहीं मिलता जनाब।
जो मैं जलते चिराग में पड़ा तेल हूँ, तो सच यह है कि बहना तुम उस चिराग में जलती बाती हो।
खुला जब-जब पन्ना कहानी का मेरी, मैंने पाया बहना सदा इसमें नाम छुपा तुम्हारा