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मेरे उज्जवल भविष्य के लिए जो त्याग तुमने किया, वैसा त्याग शायद कोई दूसरा नहीं कर पायेगा ।

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बोलो बहन कैसे कह दूँ कि मैं तुम्हारे बिना सभ्य हुआ, वास्तविकता तो यही है कि तुमसे ही सभ्यताओं का सृजन हुआ है ।
मैं अकेला रह जाता मायूसी भर के, जो तू मेरे घर का चिराग ना बनती मैं फिर कभी ऐसा हसमुख ना होता, जो तू बहना मेरा मान ना बनती
आशाओं की किरण ओझिल हो नहीं सकती नारी भी कभी यूँ ही अवला हो नहीं सकती मेरी बहन को देखा मैंने, जो वीरांगना की परिभाषा हैं उसके होने पर मैं निर्भय, वो मेरी विजय की आशा है
सुन बहन आँखों की चमक कभी कम मत होने देना जो होता हो हो जाए, तू हंसती आँखों को मत रोने देना
खुला जब-जब पन्ना कहानी का मेरी , मैंने पाया बहना सदा इसमें नाम छुपा तुम्हारा
मेरे भीतर पनपे विश्वास की जड़ तुम हो बहना, मेरी जीत का एकलौता श्रेय तुम हो बहना
जो मैं जलते चिराग में पड़ा तेल हूँ, तो सच यह है कि बहना तुम उस चिराग में जलती बाती हो ।
मेरी बहन ही तो है जो रोज मेरा हाल कुछ इस अंदाज़ में पूछती है मेरे सवालों पर हंसती है और मेरी फ़िक्र में सुबह-शाम झूझती है
शर्म नहीं तू गर्व हैं बहना, मेरी कलम का लिखा तू हर्फ़ है बहना तेरी नीयत मेरी पहचान है बहना, तू मेरी इकलौती शान है बहना
मेरे उज्जवल भविष्य के लिए जो त्याग तुमने किया, वैसा त्याग शायद कोई दूसरा नहीं कर पायेगा।