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माना दूरियां कुछ बढ़ सी गई है, मगर तेरे हिस्से का वक्त हम आज भी तनहा गुजरते हैं

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जहां में डूबा था मुझे वही किनारा चाहिए, तू फिर आ मेरे पास मुझे तू दोबारा चाहिए
ठुकरा दिया जिन्होंने मुझे मेरे वक्त को लेकर ऐसा वक्त लाऊंगा की मिलेंगे मुझसे वो लोग थोड़ा वक्त लेकर।
मैंने कुछ वक्त चुप रहकर भी देख लिया, किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता
वक़्त कट तो भी नहीं, वक़्त रुकता भी नहीं। दिल है सजदे में मगर, इश्क झुकता भी नहीं।
सबर मेरा कोई क्या ही आजमाएगा, मैंने हंस के छोड़ा है उसे जो मुझे सबसे प्यारा था
खुद की तरक्की में इतना वक़्त लगा दो, कि किसी दूसरे की बुराई करने का वक़्त न मिले।
बदल लो ख़ुद को वक़्त के साथ या फिर वक़्त बदलना सीखो, मजबूरियों को कोसों मत हर हाल में चलना सीखो!
ज़िंदगी ना कर जिद उनसे बात करने की, वो बड़े लोग हैं अपनी मर्जी से बात करेंगे
मुड़ कर देखा तो वक्त खड़ा था जिंदगी और मौत के बीच पड़ा था
वो सोचती होगी बड़े चैन से सो रहा हु मै, उसे क्या पता ओढ़ कर चादर रो रहा हु में