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मिली थी जिंदगी किसी के काम आने के लिए, पर वक़्त बीत रहा है कागज के टुकड़े कमाने के लिए।
मैंने कुछ वक्त चुप रहकर भी देख लिया, किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता
लोग आपको नहीं आपके अच्छे वक़्त को अहमियत देते हैं
वक्त को अपना वक्त बनाने में वक्त लगती है I
जिंदगी रेल सी गुजर रही हैं, उम्मीदे स्टेशन सी छूट रहीं हैं.
यूँ सिमट गया मेरा प्यार चंद अल्फाज़ो में ! जब उसने कहा मोहब्बत तो है पर तुमसे नहीं.
वक्त से पहले मिली चीजें अपना मूल्य खो देती है और वक्त के बाद मिली चीजे अपना महत्व।
उम्मीद से बढ़कर निकली तुम तो ! मैंने तो सोचा था दिल ही तोड़ोगी तुमने तो मुझे ही तोड़ दिया
कितना भी पकड़ो फिसलता जरूर है, ये वक्त है साहब बदलता जरूर है।
अभी धूप निकलने के बाद भी जो सोया है ! वो ज़रूर तेरी याद में रातभर रोया है.