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आत्मसम्मान एक ऐसी सड़क है, जो देर सवेर ही सही, लेकिन आपको आपकी मंजिल तक जरूर पहुंचाती है।

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मंज़िल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है पंख से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है।
दूसरो के लिए कभी अपने उसूलों के साथ समझौता न कीजिए अपने आत्मसम्मान की रक्षा खुद कीजिए !
जब रास्तों पर चलते चलते मंजिल का ख्याल ना आये तो आप सही रास्ते पर है।
आत्मविश्वास तो हर कोई अपने में ले आता है, लेकिन आत्मसम्मान का तजुर्बा उम्र के साथ आता है।
अगर आपने सफर शुरू कर ही दिया है तो बीच रास्ते से लौटने का कोई फायदा नहीं होगा, क्योंकि वापस आने में जितनी दूरी तय होगी क्या पता मंजिल उससे भी पास हो.
सामने हो मंजिल तो रास्ते ना मोड़ना जो भी हो मन में वह सपने मत तोड़ना। कदम कदम पर मिलेंगी मुश्किले आपको बस सितारे चुनने के लिए जमीन मत छोड़ना॥
मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है !
हौसले बुलंद कर रास्तों पर चल दे तुझे तेरा मुकाम मिल जाएगा, बढ़कर अकेला तू पहल कर देखकर तुझको, काफिला खुद बन जाएगा !
मेरी मंजिल मेरा हौंसला देख कर
अगर आपने सफर शुरू कर ही दिया है तो बीच रास्ते से लौटने का कोई फायदा नहीं होगा, क्योंकि वापस आने में जितनी दूरी तय होगी क्या पता मंजिल उससे भी पास हो