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आत्मविश्वास तो हर कोई अपने में ले आता है, लेकिन आत्मसम्मान का तजुर्बा उम्र के साथ आता है।

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मैं उस दरख्त की तरह हूं जिसके पत्ते रोज गिरकर जमीन पर बिखर जाते हैं, लेकिन वह हवाओं से अपना रिश्ता कभी नहीं बदलता।
सभी की खुशियों का ख्याल रखते-रखते हम बड़े हो जाते हैं फिर एक दिन अचानक ही अपनी खुशी गायब हम पाते हैं।
अपनी जिंदगी की हर बात को इतनी गंभीरता से न लीजिए। आप किसी मिसाइल का निर्माण नहीं कर रहे हैं।
ये शिकायत नहीं तजुर्बा हैं ज़नाब की, क़द्र करने वालो की कोई क़द्र नहीं होती!
आत्मसम्मान एक ऐसी सड़क है, जो देर सवेर ही सही, लेकिन आपको आपकी मंजिल तक जरूर पहुंचाती है।
जिंदगी हसीन है, खुल के जी कर तो देखिए बरसों से लगी इस धूल को हटाकर तो देखिए।
एक पतंग की तरह उड़ना सीखो, जो उड़ती तो आजाद है लेकिन संस्कारों की डोरी साथ लेकर।
सूरज और चांद की ख्वाहिश नहीं मुझे जहां दिल को सुकून मिले वहीं मेरे खुदा का दर है।
आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत, असफलता नामक बिमारी को मारने के लिए सबसे बढ़िया दवाई है। ये आपको एक सफल व्यक्ति बनाती है।
मैं गलत हो सकता सकती हूं, लेकिन नकारा नहीं। खराब घड़ी भी दिन में एक बार सही समय बताती है।