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ज़िन्दगी की हक़ीक़त को बस इतना ही जाना है , दर्द में अकेले हैं खुशियों में ज़माना है
हुस्न वाले जब तोड़ते हैं दिल किसी का ! बड़ी मासूमियत से कहते हैं मजबूर थे हम !!
वो किताबों में लिखा नहीं था , जो सबक़ ज़िन्दगी ने सिखाया मुझे !
सूरज और चांद की ख्वाहिश नहीं मुझे, जहां दिल को सुकून मिले वहीं मेरे खुदा का दर है।
तुम कहा हो मेरे करीब आओ, मैं कहा हु मुझे पता तो चले..!!!
बहुत अंदर तक तबाह कर देते हैं ! वो अश्क़ जो आँखों से गिर नहीं पाते !!
अब मत खोलना मेरी ज़िंदगी की पुरानी किताबों को.. जो था वो मैं रहा नहीं, जो हूं वो किसी को पता नहीं!
मैं झुक के उसके सामने खड़ा क्या हुआ, उसने मुझे पायदान बना दिया!
हँसकर दर्द छुपाने का हुनर मशहूर था मेरा ! पर कोई हुनर काम न आया जब तेरा नाम आया !!
कौन कहता है आईना झूठ नहीं बोलता. वह सिर्फ होठों की मुस्कान देखता दिल का दर्द नहीं…