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मैं झुक के उसके सामने खड़ा क्या हुआ, उसने मुझे पायदान बना दिया!
जिन्हें नींद नहीं आती उन्हें को मालूम है सुबह आने में कितने ज़माने लगते हैं
बहुत अंदर तक तबाह कर देते हैं ! वो अश्क़ जो आँखों से गिर नहीं पाते !!
तुम कहा हो मेरे करीब आओ, मैं कहा हु मुझे पता तो चले..!!!
हँसकर दर्द छुपाने का हुनर मशहूर था मेरा ! पर कोई हुनर काम न आया जब तेरा नाम आया !!
दर्द कम नहीं हुआ है मेरा ! बस सहने की आदत हो गयी है !!
न जाने किस कॉलेज से ली थी मोहब्बत की डिग्री उसने ! जितने भी मुझसे वादे किये थे सब फ़र्ज़ी निकले !!
सूरज और चांद की ख्वाहिश नहीं मुझे, जहां दिल को सुकून मिले वहीं मेरे खुदा का दर है।
उदास करती है मुझे हर रोज़ ये शाम, ऐसा लगता है जैसे कोई भुला रहा है धीरे-धीरे…!!
अब मत खोलना मेरी ज़िंदगी की पुरानी किताबों को.. जो था वो मैं रहा नहीं, जो हूं वो किसी को पता नहीं!