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इंसान नीचे बैठा दौलत गिनता है कल इतनी थी आज इतनी बढ़ गयी। ऊपर वाला हंसता है और इंसान की सांसे गिनता है, कल इतनी थी आज इतनी कम हो गयी।

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इंसान का असली चेहरा तब सामने आता हैं जब वो नशे में होता हैं... फिर चाहे नशा पैसे का हो, पद का हो, शक़्ल का हो या शराब का...
मेरी जिंदगी एक बंद किताब है, जिसे आज तक किसी ने खोला नहीं, जिसने खोला उसने पढा नही, जिसने पढा उसने समझा नही, और जो समझ सका वो मिला नहीं।
इस जीवन में मैं पूरी तरह से इंसान हूं: महसूस करना, देना, लेना, हंसना, खोना, मिलना, नाचना, प्यार करना, इंसान बनना। ये सारी चीज़े इंसान के जीवन का एक अहम हिस्सा है।
जब इंसान तन्हा चलना सीख जाता है तब वो दुनिया को समझ चुका
जब इंसान अन्दर से टूटता है तो बहार से खामोश हो जाता
जिंदगी ने सवालात बदल डाले, वक्त ने हालात बदल डाले, हम तो आज भी वही हैं जो कल थे, बस लोगों ने अपने ख्यालात बदल डाले।
अगर दुसरों को दुखी देखकर तुम्हे भी दुःख होता है तो, समझ लो की उपर वाले ने तुम्हे इंसान बनाकर कोई गलती नहीं की है
मैदान में हारा हुआ इंसान फिर से जीत सकता है, लेकिन मन से हारा हुआ इंसान कभी नहीं जीत सकता।
पानी मे तस्वीर कहाँ बनती है, ख्वाबों से तकदीर कहाँ बनती है, कोई भी रिश्ता हो जिंदगी में सच्चे दिल से निभाओ, क्योंकि ये जिंदगी वापस किसे मिलती है।
इंसान का सारा ध्यान आज बस इस बात पर है कि ज़िंदगी जीने के तरीकों में कैसे सुधार किया जाए