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सुनो ! तुम मेरी वो आदत हो, जिसे मैं चाह कर भी नहीं छोड़ सकता !

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जागना एक आदत है मेरी मेरी सफ़लता चाहत है मेरी।
जो भी शर्तों पर आधारित है, वह प्रेम नहीं है।
तुम्हें देखा तो मोहब्बत भी समझ आई, वरना इस लफ्ज़ की तारीफ सिर्फ ही सुना करता था मैं !
हौसले बुलंद कर रास्तों पर चल दे.. तुझे तेरा मुकाम मिल जाएगा, बढ़कर अकेला तू पहल कर देखकर तुझको, काफिला खुद बन जाएगा।
तम्मना हो मिलने की तो बंद आँखों में भी नज़र आएंगे महसूस करने की तो कोशिश कीजिए दूर होते हुए भी पास नजर आएंगे !
अब तो शायद ही मुझसे मुहब्बत करेगा कोई, तेरी तस्वीर जो मेरी आखों में साफ नजर आती है !
जिंदगी हसीन है, खुल के जी कर तो देखिए, बरसों से लगी धूल को हटाकर तो देखिए !
अपने प्रेम, अपनी खुशी और अपने उल्लास को रोककर मत रखें। आप जो देते हैं, वही आपका गुण बन जाता है, न कि वह जो आप रोक कर उल्लास हैं।
ख़ुशी, शांति और प्रेम – ये कोई आध्यात्मिक लक्ष्य नहीं हैं। यह सब तो समझदारीपूर्वक जीने की शुरुआत है।
मूल रूप में, प्रेम का अर्थ हैः पसंदों और नापसंदों से ऊपर उठ जाना।