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आंसूं किसी के दुःख को समझता नहीं है, और न ही किसी की ख़ुशी को
दुःख तुमने मुझे नहीं दिया है, मैंने अपने आप को दुःख दिया है.
जिसे हारने का डर है, उसकी हार निश्चित है!
ऐसी दुनिया का आगाज़ करो जो कल करो सो आज़ करो - चंदन की कलम
व्यक्ति कर्मों में जीता है वर्षों में नहीं
जब इंसान जिंदगी कि अपनी सभी इच्छाओं से, मुक्त हो जाता है या कहो वो अपने सारे इन्द्रियों को, अपने काबु में रखता है, तब ही उसे शांति मिल सकती है!
दुःख छुपाने के कमाल को हसी कहते है
अस्तित्व की इस लड़ाई में एक संघर्ष दायित्व का भी है।
आंसू किसी और के दुख को समझता नहीं है, और न ही किसी की खुशी को। - Franz Schubert
सच को एक हजार अलग-अलग तरीकों से कहा जा सकता है, फिर भी हर एक सच हो सकता है।