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ऐसी दुनिया का आगाज़ करो जो कल करो सो आज़ करो - चंदन की कलम
पैसा" आज के जमाने में इज्ज़त भी पैसे देखकर किए जाते हैं, बिना पैसे के तो लोग ज़रूरत भी नहीं समझते। -तेजस्विनी कुमारी
भाई से ज्यादा ना कोई उलझता हैं, ना भाई से ज्यादा कोई समझता हैं.
व्यक्ति कर्मों में जीता है वर्षों में नहीं
जब इंसान जिंदगी कि अपनी सभी इच्छाओं से, मुक्त हो जाता है या कहो वो अपने सारे इन्द्रियों को, अपने काबु में रखता है, तब ही उसे शांति मिल सकती है!
कौन ज्यादा मजबूर है वो जो सड़कों पर सुकून की नींद सोता है या वो जो लाखों के घर में भी नींद के लिये तरसता है।
लम्हे तो है बीते सारे लेकिन लगते है आज भी जैसे हो वो कल
दिल के रिश्तों में पैसों का हिसाब नही होता... क्यूं की पैसों से चीजों का सौदा होता है , इंसानों का नहीं, और अगर हो सौदा रिश्तों में तो वो रिश्ता दिल से नही होता - prabhamayee parida
आंसू किसी और के दुख को समझता नहीं है, और न ही किसी की खुशी को। - Franz Schubert
कहो कि कैसे गुजर रही है रात भारी या दिन है गम में, या हमारी तरह जिंदगी रेत सी यूं फिसल रही है।