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हमें तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहाँ दम था, मेरी किश्ती थी डूबी वहां, जहाँ पानी कम था…
ज़िन्दगी में एक हसी वो होती है जो इंसान अपने ग़म को छुपाने के लिए खुद सीखता है, और एक हसी वो होती है जो इंसान के सारे ग़म भुला देती है
ना कोई तरंग है, ना कोई उमंग है, मेरी ज़िन्दगी भी क्या एक कटी पतंग है
प्यार हम दोनों ने किया, मगर तड़पना सिर्फ मेरे नसीब में आया
जिसका दिल ग़म की तन्हाइयों में उजड़ गया हो, वो बाहर से कितना ही सेहतमंद लगता हो, लेकिन अंदर से तो बीमार ही रहता है
लोग वही कहने जा रहे हैं जो वे कहना चाहते हैं और वही सोचते हैं जो वो सोचना चाहते हैं, और मैं उनका विचार नहीं बदल सकता।
दर्द की दवा न हो, तो दर्द को ही दवा समझ लेना चाहिए…
मैं ज़िन्दगी से नहीं, अपने आप से नाराज़ हूँ – अर्जुन
हम हार गए क्योंकि हमने खुद से कहा कि हम हार गए.
जब प्यार करने वाले अपने जज़्बातों को दबाकर, रिश्तों को कोई दूसरा नाम देते है, तो कभी न कभी, कहीं न कहीं जज्बातों फूट फूटके रोने लगते है