#Hindi Quote
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ज़िन्दगी तेरे भी कितने नखरे है, एक दिन हँसाकर महीनों रुलाती है।
जिसका दिल ग़म की तन्हाइयों में उजड़ गया हो, वो बाहर से कितना ही सेहतमंद लगता हो, लेकिन अंदर से तो बीमार ही रहता है
जब इंसान अन्दर से टूटता है तो बहार से खामोश हो जाता
ज़िन्दगी एक ढलती शाम की तरह है, जिसमें कहीं उथल-पुथल है, तो कहीं थोड़ा आराम भी
‘जिन्दगी’ का कोई रिमोट नहीं होता, उठो जागो और खुद बदलो
ज़िन्दगी बदलने के लिए लड़ना पड़ता हैं, और आसान करने के लिए समझना पड़ता हैं…
कभी तो चौक के देखे कोई इंसान तरफ, किसी की आंख में हमको भी इंतजार दिखे।
इंसान का सारा ध्यान आज बस इस बात पर है कि ज़िंदगी जीने के तरीकों में कैसे सुधार किया जाए।
मुस्कुराते हुए इंसान की कभी जेबे देखना, हो सकता है रूमाल गिला मिले!
जिन्दगी जिन्हें ख़ुशी नहीं देती, उन्हें तजुर्बे बहुत देती है !