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गुज़र जायेगा ये दौर भी ज़रा सब्र तो रख ! जब खुशियाँ ही न रुकी तो ग़म की क्या औकात है !!
किताबों से बढ़कर सच्चा दोस्त और कोई नहीं हो सकता। यह आपके सुख-दुख तथा जीवन के हर पड़ाव में आपका साथ देता है।
आप किस कुल, परिवार में जन्मे हो इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता। आपको बस दूसरों से हटकर अपनी राह बनानी होती है।
गुज़र जायेगा ये दौर भी ज़रा सब्र तो रख ! जब खुशियाँ ही न रुकी तो ग़म की क्या औकात है !!
हमें शिक्षा केवल नौकरी पाने के लिए ही नहीं लेनी चाहिए। जन सेवा व मानव हित का कार्यभार भी हमारे युवा वर्ग के हाथों में ही है।
आपके माता-पिता आपकी पढ़ाई के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करते हैं, आप का भी कर्तव्य बनता है कि आप अपनी पढ़ाई के लिए दिन रात एक कर दें।
जो लोग आलसी होते हैं, ऐसे लोगों का कोई भविष्य और वर्तमान नहीं होता है।
अपनी मेहनत पर भरोसा रखो, किस्मत खुद ही बदल जाएगी ।
मैने वहां भी सिर्फ तुम्हे मांगा, जहां लोग खुशियां मांगते है
खुदा करे तुझे खुशियां हजार मिले, जीवन तुझे खुशहाल मिले, रहे हर जन्म साथ अपना और तू ही हर जन्म मुझे भाई मिले!