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हजारों ख़्वाब टूटते हैं, तब कहीं एक सुबह होती है.

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मुझे खुद पर इतना भरोसा है कि यह दिल हजारों के बीच रहकर भी सिर्फ आपका रहेगा.
न जाने कितने ही रिश्ते खत्म कर दिये इस भ्रम ने कि मैं सही हूं, सिर्फ मैं ही सही हूं
खामोश चहरे पर हजारों पहरे होते है, हस्ती आंखो में भी ज़ख्म गहरे होते है
हलके-हलके बढ़ रही है चेहरे की लकिरें; लगता है, नादानी और तजुर्बे का बंटवारा हो रहा है
एक ऐसा लक्ष्य निर्धारित करें जो आपको सुबह बिस्तर से उठने पर मजबूर कर दें…
हज़ारों उलझनें राहों में और कोशिशें बेहिसाब, इसी का नाम है ज़िंदगी चलते रहिए जनाब- गुलज़ार
गुरुर किस बात का साहब, आज मिट्टी के उपर, तो कल मिट्टी के निचे
ज़माने लगते है सुबह होने में, जिन्हें रात को नींद नहीं आती I
हर सुबह एक नया अवसर है, बस खुद पर विश्वास रखो ।
सुख निर्मल सुबह की भाँति होता है, जो माँगने पर नहीं जागने पर मिलता है